ABHINANDANIYA BHARAT | अभिनंदनीय भारत | Questions & Answers | CLASS 8 | NOOTAN GUNJAN | ICSE HINDI

 



बोलने की बारी  

Q1. कवि भारत को जन्मभूमि समान क्यों कहता है?

उत्तर: कवि भारत को जन्मभूमि समान इसलिए कहता है क्योंकि यह हमारी जन्मभूमि और कर्मभूमि है, जो हमारे प्राणों के समान प्रिय है। जिस प्रकार माता जन्म देकर पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार इस देश ने हमें जीवन और आश्रय दिया है।

Q2. भारत का मुकुट किसे कहते हैं और क्यों?

उत्तर: भारत का मुकुट हिमालय पर्वत को कहा गया है क्योंकि यह देश के शीर्ष पर स्थित होकर एक मुकुट की तरह पूरे संसार में जगमगा रहा है और देश की शोभा बढ़ा रहा है।

Q3. संस्कृति को दुर्जेय-सी क्यों कहा गया है?

उत्तर: भारतीय संस्कृति को दुर्जेय-सी इसलिए कहा गया है क्योंकि इसे हराना या नष्ट करना अत्यंत कठिन है। यह संस्कृति अपने महान आदर्शों के कारण युगों-युगों से अजेय और सुरक्षित बनी हुई है।

Q4. स्वतंत्रता का दीपक किस तरह जल रहा है?

उत्तर: स्वतंत्रता का दीपक अमर रूप में जल रहा है और यह आलोक के पथिक की तरह बिना रुके निरंतर चल रहा है।


लिखने की बारी

(क) भारत की महिमा और गौरव का वर्णन किस प्रकार किया गया है?

उत्तर: भारत की महिमा और गौरव का वर्णन करते हुए उसे महान, पूजनीय और गौरव का भंडार कहा गया है। यहाँ की संस्कृति दुर्जेय और आदर्शों से भरी हुई है, जिसे जीतना कठिन है। इस संस्कृति का विजय ध्वज पूरे विश्व में लहराने की बात कही गई है।

(ख) ‘जन्मभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: ‘जन्मभूमि’ का आशय है जहाँ हमारा जन्म हुआ है। ‘कर्मभूमि’ का आशय है जहाँ हम कर्म करते हुए जीते हैं।

(ग) किसे सदा प्रज्वलित रखा जाएगा?

उत्तर: स्वतंत्रता के दीपक को सदा प्रज्वलित रखा जाएगा, ताकि देश में कभी गुलामी का अंधकार न आए।

(घ) कविता का केंद्रीय भाव लिखिए।

उत्तर: कविता का केंद्रीय भाव देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम है। इसमें भारत भूमि की महानता, प्राकृतिक सुंदरता और गौरवशाली संस्कृति का गुणगान किया गया है। साथ ही, अपने देशवासियों को स्वतंत्रता की रक्षा करने और देश के विकास के लिए अपने को समर्पित करने की भी प्रेरणा दी गई है।


आशय स्पष्ट कीजिए

1. “जीवन सुमन चढ़ाकर आराधना करेंगे।”

उत्तर: इसका आशय यह है कि हम अपने जीवन रूपी सुमन को भारत माता के चरणों में अर्पित करके उसकी सेवा करेंगे, उसकी पूजा करेंगे। अर्थात् हम देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने को तैयार हैं।

2. “जो संस्कृति अभी तक दुर्जेय-सी बनी है।”

उत्तर: इसका आशय यह है कि संस्कृति जो हमें विरासत में मिली है, इतनी मजबूत और समृद्ध है कि इतिहास में कोई भी विदेशी ताकत या कोई भी परिस्थिति इसे नष्ट नहीं कर पाई। यह आज भी अजेय और अमर है।

Previous Post Next Post