I
- "वह तमीज तो बस आप लोगों को है... नौकर से काम लेने का भी ढंग होता है।"
(क) वक्ता और श्रोता कौन
हैं? कथन का आशय संदर्भ-सहित स्पष्ट कीजिए?
उत्तर - यहाँ वक्ता इंदु है और श्रोता बड़ी बहू (बड़ी भाभी) है। जब
छोटी बहू बेला ने पुरानी मिश्रानी रजवा को काम से हटा दिया, तो इंदु ने बेला को समझाया
कि नौकरों से काम लेने का एक ढंग होता है। इस पर बेला ने ताना मारते हुए कहा कि 'वह
तमीज तो बस आप लोगों को है।' इंदु यही घटना बड़ी भाभी को बता रही है।
(ख) वक्ता का परिचय दीजिए।
उत्तर - यहाँ वक्ता इंदु हैं, जो छोटी भाभी की बेटी और दादा जी की लाडली पोती है। वह घर की परंपराओं
और पुराने नौकरों का सम्मान करती है। बेला के आने से पहले तक वह घर में सबसे अधिक पढ़ी-लिखी
मानी जाती थी और उसकी घर में खूब चलती थी।
(घ) “वह तमीज़ तो बस आप लोगों को
है।“ यह वाक्य किसने किससे कहा?
इस कथन से उसके स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर - यह वाक्य छोटी बहू बेला ने इंदू से कहा था। इससे बेला की
अभिमानी और तुनक-मिज़ाज़ स्वभाव का पता चलता है। वह अपने मायके के रहन-सहन पर गर्व
करती है और ससुराल वालों को असभ्य, गँवार समझती है।
(घ) बेला का चरित्र चित्रण
कीजिए।
उत्तर - बेला घर की छोटी बहू है। वह लाहौर के एक प्रतिष्ठित और सुशिक्षित
परिवार से आई है। वह आधुनिक विचारों वाली सुशिक्षित लड़की है, लेकिन उसमें बड़प्पन का
अहंकार है। वह बात-बात पर अपने मायके की तुलना ससुराल से करती है। वह भावुक भी है,
अंत में परिवार वालों का आदर और दादा जी के स्नेह से उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है।
II
- "और वह ढंग मुझे नहीं आता, मैंने नौकर तो यहीं आकर देखे हैं। काम लेने का ढंग
उसे आता है, जिसे परख..."
(क) उपर्युक्त कथन किसका
है? उसके संबंध में बताइए।
उत्तर - यह कथन इंदू का है, जो बेला द्वारा कही गई बातों को दोहरा
रही है। असल में ये शब्द घर की छोटी बहू बेला के हैं। बेला नायब तहसीलदार परेश की पत्नी
है, जिसे ससुराल के पुराने नौकरों का काम करने का ढंग पसंद नहीं है।
(ख) उपर्युक्त कथन का संदर्भ
स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - जब इंदु ने बेला को समझाया कि नौकरों से काम लेने की तमीज़
होनी चाहिए, तो बेला ने चिढ़कर जवाब दिया कि उसे वह ढंग नहीं आता क्योंकि उसने ऐसे फूहड़
नौकर ससुराल में ही देखे हैं। उसके अनुसार काम लेने का ढंग उसे आता है जिसे काम की
परख हो।
(ग) वक्ता ने अपने परिवार
के बारे में क्या कहा?
उत्तर - बेला ने अपने मायके की बड़ाई करते हुए कहा कि उसके मायके
में नौकर सलीकेदार होते हैं। उसने ताना मारा कि ऐसे फूहड़ नौकरों से तो उसके ससुराल
वाले ही गुज़ारा कर सकते हैं; उसके मायके में ऐसी गँवार मिश्रांनी दो घड़ी भी नहीं
टिकती।
III
- "हम तो उसके लिए मूर्ख गंवार और असभ्य हैं।"
(क) प्रस्तुत अवतरण किस एकांकी
से लिया गया है? उपर्युक्त पंक्तियाँ किसने, किससे, किस संदर्भ में, कही है?
उत्तर - यह अवतरण 'सूखी डाली' एकांकी से लिया गया है। ये पंक्तियाँ
इंदु ने अपनी बड़ी भाभी से कही हैं। ये बात उन्होंने तब कही जब बेला ने रजवा मिश्रानी
को काम से निकाल दिया, तब इंदु ने बेला के अहंकारी स्वभाव और बात-बात में मायके की
बढ़ाई करने की शिकायत बड़ी भाभी से की।
(ख) 'वह किसी को कुछ गिनती
ही नहीं' - 'वह' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसके मायके में किस प्रकार
का वातावरण था?
उत्तर - ‘वह’ शब्द का प्रयोग छोटी बहू बेला के लिए किया गया है।
बेला के मायके का वातावरण आधुनिक, पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित और संपन्नता से भरा
था, जहाँ नौकर भी सलीकेदार होते थे।
(ग) उसके मायके तथा ससुराल
के वातावरण में क्या अंतर है?
उत्तर - बेला के मायके में आधुनिकता, दिखावा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
थी। इसके विपरीत, उसके ससुराल में पारंपरिकता, संयुक्त परिवार का ढाँचा, पुराने वफादार
नौकर और घर के बड़ों का अनुशासन था।
(घ) उसका मन ससुराल में क्यों
नहीं लगता था? अपनी गृहस्थी अलग बसाने के लिए वह क्या चाहती थी?
उत्तर - बेला का मन ससुराल में इसलिए नहीं लगता था क्योंकि वहाँ
का रहन-सहन, पुराना फर्नीचर और गंवार नौकर उसे पसंद नहीं थे। अपनी गृहस्थी अलग बसाने
के लिए वह चाहती है कि उसे ससुराल से अलग 'बाग वाला मकान' मिल जाए ताकि वह अपनी इच्छा
और स्वतंत्रता से जी सके।
IV
- "फिर कैसे चलेगा? हमारे घर में तो मिलकर रहना, बड़ों का आदर करना, अपने घर की
रूखी को दूसरी की चुपड़ी से अच्छा समझना, नौकरों पर दया और छोटों पर..."
(क) वक्ता और श्रोता कौन
हैं? कथन का संदर्भ स्पष्ट करें।
उत्तर - वक्ता छोटी भाभी बेला की सास और इंदु की माँ है और श्रोता
इंदु है। जब इंदु अपनी माँ को बेला की कमियाँ और ससुराल से उसकी घृणा के बारे में बताती
है, तब वह चिंतित होकर यह बात कहती है।
(ख) 'फिर कैसे चलेगा?' वाक्य
का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - इस वाक्य का आशय यह है कि यदि बेला इसी प्रकार ससुराल की
हर बात से नफरत करेगी और अपने मायके की रट लगाए रखेगी, तो इस संयुक्त परिवार में उसका
निर्वाह कैसे होगा।
(ग) उपर्युक्त पंक्तियों
में वक्ता अपने परिवार की किस विशेषता का उल्लेख कर रहा है?
उत्तर - उपर्युक्त पंक्तियों में वक्ता अपने परिवार की विशेषताओं
का उल्लेख कर रही है - आपस में मिल-जुलकर रहना, बड़ों का सम्मान करना, अपने घर की रूखी-सूखी
को दूसरों की चुपड़ी रोटी से बेहतर समझना और नौकरों पर दया करना इस घर की परंपरा है।
(घ) वक्ता के चरित्र की प्रमुख
विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर - वक्ता यहाँ छोटी भाभी (बेला की सास) है। वह एक समझदार, सुलझी
हुई, परिवार को जोड़ने वाली और भारतीय परंपराओं का सम्मान करने वाली महिला है जो घर
में शांति बनाए रखना चाहती है।
V
- "इस फर्नीचर पर हमारे दादा बैठते थे, पिता बैठते थे, चाचा बैठते थे। उन लोगों
को कभी शर्म नहीं आई, उन्होंने कभी फर्नीचर के गले सड़े होने की शिकायत नहीं की।"
(क) उपर्युक्त वाक्य का संदर्भ
लिखिए।
उत्तर - जब बेला ने अपने कमरे का पुराना फर्नीचर बाहर निकाल दिया
था, तब उसके पति परेश ने उसे समझाने का प्रयास किया कि यह खानदानी फर्नीचर है, इसे
हटाने से दादा जी क्या सोचेंगे।
(ख) वक्ता और श्रोता कौन-कौन
हैं? दोनों का परिचय दीजिए।
उत्तर - यहाँ वक्ता दादा का पोता परेश है और श्रोता उसकी पत्नी बेला
है। परेश दादा मूलराज का पोता है, जो नायब तहसीलदार है। वह एक सीधा-सादा, समझदार और
बुद्धिमान व्यक्ति है जिसे अपने परिवार से बहुत लगाव है। वह अपने परिवार के सभी बड़ों
का आदर करता है और दादा की बात को हमेशा स्वीकार करता है। बेला परेश की पत्नी और घर
की सबसे छोटी बहू है। वह बहुत पढ़ी-लिखी है और उसे अपने परिवार की संपन्नता तथा तौर-तरीकों
पर नाज़ है।
(ग) फर्नीचर के संबंध में
किसका कथन उद्धृत किया जा रहा है?
उत्तर - फर्नीचर के संबंध में नायब तहसीलदार परेश (बेला का पति)
का कथन उद्धृत किया जा रहा है।
(घ) परेश का चरित्र चित्रण
कीजिए।
उत्तर - परेश दादा मूलराज का सबसे छोटा पोता है जो हाल ही में नायब
तहसीलदार बना है। वह एक पढ़ा-लिखा लेकिन दब्बू किस्म का व्यक्ति है। वह अपनी पत्नी
बेला से दबता है, लेकिन साथ ही अपने दादा जी और परिवार की परंपराओं का सम्मान भी करता
है।
VI
- "तुम भी बहन, बस... क्या इतना पढ़ लिखकर छोटी बहू कपड़े धोएगी?"
(क) उपर्युक्त वाक्य किसने,
किससे, किस संदर्भ में कहा है?
उत्तर - यह वाक्य बड़ी भाभी ने छोटी भाभी (बेला की सास) से कहा है।
जब छोटी भाभी ने इंदु से कहा कि दादा जी के कपड़े धोने के बाद वह छोटी बहू बेला को
समझा देगी, तब बड़ी भाभी ने यह बात कही।
(ख) छोटी बहू कौन है? वह
किस पारिवारिक परिवेश से आई है?
उत्तर - छोटी बहू बेला परेश की पत्नी है। वह लाहौर के एक अत्यंत
प्रतिष्ठित, संपन्न और सुशिक्षित परिवार से आई है, जहाँ उसे कभी भी घर के छोटे-मोटे
काम नहीं करने पड़े।
(ग) वह परिवार से क्यों अलग
होना चाहती थी?
उत्तर - वह परिवार से अलग रहना चाहती थी क्योंकि उसे वहाँ का रहन-सहन,
तौर-तरीका और लोगों की दखलअंदाज़ी बिल्कुल पसंद नहीं थी। वह स्वतंत्र रहना चाहती थी
इसलिए बाग वाले मकान में जाना चाहती थी।
(घ) वह बात-बात में किस बात
की चर्चा करती थी?
उत्तर - वह बात-बात में अपने मायके की रईसी, वहाँ के सलीकेदार नौकरों,
अच्छे रहन-सहन और बड़े कमरों के बहुमूल्य फर्नीचर की चर्चा करती रहती थी।
VII
- "मैं कहा करता हूँ न बेटा कि एक बार वृक्ष से जो डाली टूट गई, उसे लाख पानी
दो, उसमें वह सरसता न आएगी और हमारा यह परिवार बरगद के इस महान पेड़ की भाँति है।"
(क) वक्ता कौन है? उसके मन
में ये विचार किस घटना को देखकर आए?
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं। जब उन्होंने देखा कि बच्चे खेल-खेल
में वट वृक्ष की एक टूटी हुई डाली को जमीन में गाड़कर उसे पानी दे रहे हैं, तब उनके
मन में यह विचार आया कि टूटी डाली कभी पनपती नहीं, मुरझा जाती है।
(ख) वक्ता ने अपने परिवार
की तुलना बरगद के पेड़ से क्यों की है?
उत्तर - वक्ता ने अपने परिवार की तुलना बरगद के पेड़ से की है क्योंकि
दादा जी का संयुक्त परिवार बरगद के पेड़ के समान विशाल है, जो अपनी सभी डालियों को
आश्रय देता है। दादा जी का मानना है कि परिवार का हर एक सदस्य इस पेड़ की एक डाली है।
(ग) 'एक बार वृक्षों से जो
डाली टूट गई, उसे लाख पानी दो, उसमें वह सरसता न आएगी।' - इस कथन से वक्ता का क्या
आशय है?
उत्तर - इस कथन से वक्ता का आशय यह है कि जो सदस्य संयुक्त परिवार
से अलग हो जाता है, वह उस प्रेम, सुरक्षा और सम्मान से वंचित हो जाता है जो उसे परिवार
के साथ रहकर मिलता है।
(घ) उपर्युक्त कथन किस एकांकी
से लिया गया है, उसमें एकांकीकार ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर - यह कथन 'सूखी डाली' एकांकी से लिया गया है। एकांकीकार ने
यह संदेश दिया है कि यदि परिवार का मुखिया दूरदर्शी, बुद्धिमान तथा व्यवहारकुशल हो
तो भी परिवार के सदस्यों के विचारों एवं स्वभाव में भिन्नता होते हुए भी वे सब एकता
और प्रेम की डोर से बंधे रहते हैं। परिवार में रहकर ही उन्नति और विकास किया जा सकता
है।
VII
- "बड़प्पन बाहर की वस्तु नहीं - बड़प्पन तो मन का होना चाहिए। और फिर बेटा घृणा
को घृणा से नहीं मिटाया जा सकता।"
(क) वक्ता और श्रोता का परिचय
दीजिए तथा कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता उनका मंझला बेटा कर्मचंद
है। जब कर्मचंद ने बताया कि छोटी बहू को मलमल के थान और रजाई के अबरे के कपड़े पसंद
नहीं आए और उसके मन में दर्प की मात्रा जरूरत से कुछ ज्यादा है, तब दादा ने उसे समझाते
हुए यह बात कही।
(ख) वक्ता एवं श्रोता का
संबंध स्पष्ट करते हुए वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं, जो कर्मचंद के पिता हैं और कर्मचंद
दादा मूलराज का मंझला बेटा है। दादा मूलराज अत्यंत अनुभवी, दूरदर्शी, परिवार को जोड़ने
वाले और महान विचारों वाले व्यक्ति हैं, जो घृणा को प्रेम से जीतने में विश्वास रखते
हैं।
(ग) 'मन में बड़प्पन' से वक्ता
का क्या आशय है?
उत्तर - ‘मन में बड़प्पन’ से आशय है कि व्यक्ति अपने सद्गुणों, प्रेम,
त्याग और सहनशीलता से बड़ा होता है, न कि केवल बाहरी दिखावे, धन या शिक्षा के अहंकार
से।
(घ) छोटी बहू कौन है? उसके
चरित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर - छोटी बहू बेला है, जो पढ़ी-लिखी, आधुनिक विचारों वाली और
स्वाभिमानी महिला है। शुरुआत में वह अभिमानी और तुनकमिज़ाज दिखाई देती है, लेकिन बाद
में परिवार का प्रेम और सम्मान देखकर उसका दिल पिघल जाता है। वह अत्यंत भावुक है।
IX
- "ठूंठ वृक्ष आकाश को छूने पर भी अपनी महानता का सिक्का हमारे दिलों पर उस समय
तक नहीं बैठा सकता, जब तक अपनी शाखाओं में वह ऐसे पत्ते नहीं लाता जिनकी शीतल सुखद
छाया मन के समस्त ताप को हर ले..."
(क) वक्ता और श्रोता कौन
हैं? कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता कर्मचंद हैं। जब कर्मचंद
ने दादा जी को बेला के बारे में बताया, तब दादा उसे समझाते हुए कहते हैं कि परिवार
की नवविवाहिता बहू की घृणा को घृणा से नहीं बल्कि स्नेह से मिटाया जाना चाहिए।
(ख) वक्ता का परिचय दीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं, वे 72 वर्ष के हैं और परिवार के
मुखिया हैं। वे अनुभवी, धैर्यवान और परिवार रूपी वट वृक्ष की जड़ हैं जो अपनी सूझबूझ
से पूरे परिवार को टूटने से बचा लेते हैं।
(ग) वक्ता ने बड़प्पन एवं
महानता के संबंध में क्या-क्या कहा है?
उत्तर - वक्ता ने कहा कि महानता किसी से जबरदस्ती मनवाई नहीं जा
सकती, बल्कि यह अपने व्यवहार से अनुभव कराई जाती है। जैसे वृक्ष अपनी शीतल छाया और
सुगंध से बड़प्पन साबित करता है, वैसे ही व्यक्ति अपने स्नेहपूर्ण व्यवहार से।
(घ) 'सूखी डाली' एकांकी का
उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - ‘सूखी डाली’ एकांकी का उद्देश्य संयुक्त परिवार के महत्व
को दर्शाना और यह बताना है कि घर के बुजुर्गों की समझदारी, धैर्य और प्रेम से पारिवारिक
कलह को मिटाया जा सकता है।
X
- "तुम्हारी
बहू को रज़ाई के अबरे और मलमल का थान पसंद नहीं आया। तुम्हारे ताऊ ठहरे पुराने समय
के आदमी, वे नए फ़ैशन की चीज़ें खरीदना क्या जानें?"
(क)
उपर्युक्त कथन किसने, किससे तथा किस संदर्भ में कहा है? उत्तर - उपर्युक्त कथन
दादा जी ने अपने पोते
उत्तर - परेश से कहा। जब परेश दादा जी के पास बेला के अलग मकान
में रहने की बात कहने आया था।
(ख) रज़ाई
के अबरे और मलमल के थान के अलावा बहू को कौन-सी चीज़ पसंद नहीं थी?
उत्तर - रज़ाई के अबरे और मलमल के थान के अलावा बहू बेला को घर
का पुराना फ़र्नीचर, पुरानी
नौकरानी, लोगों का
दखल देना और ससुराल का रहन-सहन पसंद नहीं था।
(ग) 'ताऊ' शब्द का प्रयोग
किसके लिए किया गया है? उन्होंने दादा जी से 'बहू' के संबंध में क्या बात कही थी?
उत्तर - 'ताऊ' शब्द का प्रयोग कर्मचंद (दादाजी के मँझले बेटे) के लिए किया
गया है। उन्होंने दादा जी से कहा था कि छोटी बहू को मलमल के थान पसंद नहीं आए और
वह इस घराने को घृणा की दृष्टि से देखती है।
(घ) वक्ता
ने श्रोता को इस समस्या से निपटने के लिए क्या सुझाव दिया?
उत्तर - दादा ने परेश को सुझाव दिया कि वह बेला को स्वयं
बाज़ार ले जाए और उसकी पसंद की चीज़ें खरीद लाए ताकि उसका मन लगा रहे।
XI
- "इतना जल्दी उसका मन कैसे लग सकता है बेटा, अभी के दिन हुए हैं उसे आए? फिर बेटा मन लगता
नहीं लगाया जाता है।"
(क)
उपर्युक्त वाक्य किसने, किस संदर्भ में किससे कहा है?
उत्तर - यह वाक्य दादा मूलराज ने अपने पोते परेश से कहा। जब
परेश आकर दादा जी से कहता है कि बेला का मन इस घर में नहीं लगता है, वह अलग घर बसाना
चाहता है।
(ख) वक्ता
ने उपर्युक्त वाक्य श्रोता की कौन-सी बात सुनकर कहा?
उत्तर - दादा मूलराज ने जब परेश की यह बात सुनी कि बेला का मन
इस घर में नहीं लगता, वह अलग
घर बसाना चाहती है, तब दादा
ने यह बात कही।
(ग)
श्रोता ने इस बात का क्या उत्तर दिया?
उत्तर - परेश ने इस बात का उत्तर दिया कि "वह मन लगाती ही
नहीं।"
(घ)
श्रोता की बात सुनकर वक्ता ने पुनः क्या कहा?
उत्तर - परेश की बात सुनकर दादा जी ने कहा कि हमें उसका मन
लगाना चाहिए। वह बड़े घर से आई है। अपने पिता की इकलौती बेटी है। इस भीड़-भाड़ में
घबराती होगी। हम सब मिलकर इस घर में उसका मन लगाएँगे।
XII
- "और फिर मेरी आँखों के सामने इस महान वृक्ष की
कलियाँ टूटने लगती हैं और वह केवल ठूंठ रह जाता है।" (स्वर धीमा, जैसे अपने आप से कह रहे
हैं) "और मैं सिहर उठता हूँ। न
बेटा,
मैं अपने जीते जी यह सब न होने दूंगा। तुम
चिंता न करो। मैं सबको समझा दूंगा।"
(क) 'महान वृक्ष और
उसकी कलियाँ' से क्या
तात्पर्य है?
उत्तर - महान वृक्ष से तात्पर्य दादा जी के विशाल संयुक्त
परिवार से है। कलियाँ परिवार के युवा सदस्य परेश और बेला को कहा गया है, जो परिवार से अलग
होने की सोच रहे थे।
(ख) वक्ता
कौन है और वे क्या सोचकर सिहर उठते हैं तथा क्यों?
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं। वे परिवार के टूटने और
परेश-बेला के अलग होने की कल्पना मात्र से सिहर उठते हैं।
(ग) वक्ता
ने अपने परिवार को एकजुट रखने में किस प्रकार सफलता प्राप्त की?
उत्तर - दादा जी ने सभी सदस्यों को बुलाकर सख्त आदेश दिया कि
कोई भी छोटी बहू का अपमान नहीं करेगा, सब उसे वह सम्मान देंगे जो उसे मायके में मिलता था। इस
युक्ति से उन्होंने परिवार को टूटने से बचा लिया।
(घ) 'सूखी डाली' एकांकी के शीर्षक
की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर - 'सूखी डाली' एकांकी का शीर्षक अत्यंत सार्थक है। सूखी डाली परिवार
से अलग हुए सदस्य का प्रतीक है। एकांकी यह स्पष्ट करती है कि परिवार रूपी वृक्ष से
जुड़कर ही सदस्य पल्लवित होता है, अलग होकर वह सूखी डाली के समान निर्जीव हो जाता है।
XIII
- "बड़ा वास्तव में कोई उम्र से या दर्जे में
नहीं होता। बड़ा तो बुद्धि से होता है, योग्यता से होता
है।"
(क)
प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? यह वाक्य किसके लिए कहा गया है और क्यों?
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं। यह वाक्य छोटी बहू बेला के लिए
कहा गया है। दादा जी परिवार को समझा रहे थे कि बेला भले ही उम्र में छोटी हो, पर वह बुद्धि और
ज्ञान में हम सबसे बड़ी है।
(ख) वक्ता
ने जिसके विषय में यह वाक्य कहा है उसका वक्ता से क्या संबंध है? उसके चरित्र की
प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - दादा मूलराज ने बेला के विषय में यह वाक्य कहा है।
बेला घर की छोटी बहू है और दादाजी के पोते परेश की पत्नी है। बेला अत्यंत
सुशिक्षित, स्वाभिमानी, आधुनिक विचारों
वाली और स्पष्टवादी महिला है।
(ग)
उपर्युक्त कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - उपर्युक्त कथन का आशय यह है कि असली बड़प्पन व्यक्ति
की आयु या उसके पद से नहीं बल्कि उसकी बुद्धि, ज्ञान और श्रेष्ठ आचरण से होता है।
(घ) 'सूखी डाली' एकांकी का संदेश
स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - 'सूखी डाली' एकांकी का संदेश यह है कि पारिवारिक शांति के लिए घर
के छोटे सदस्यों के गुणों और शिक्षा का सम्मान करना चाहिए और आपसी समझदारी व
सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
XIV
- "यही मेरी आकांक्षा है कि सब डालियाँ साथ-साथ
फलें-फूलें, जीवन की सुखद, शीतल वायु के स्पर्श से झूमें और सरसाएँ। विटप से अलग होने वाली डाली की
कल्पना ही मुझे सिहरा देती है।"
(क) वक्ता
और श्रोता कौन हैं?
कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा मूलराज हैं। श्रोता इंदु और मंझली बहू हैं।
जब दादा जी ने सबको समझाकर भेज दिया, तो अंत में इन दोनों को रोककर बेला का सम्मान करने का
विशेष निर्देश दिया।
(ख) इनके 'फलने-फूलने' से वक्ता का क्या
आशय है?
उत्तर - इनके 'फलने-फूलने' से वक्ता का आशय यह है कि परिवार के सभी सदस्यों का एक
साथ मिलकर प्रेम, शांति और
समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत करना।
(ग)
श्रोता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - श्रोता इंदु और मंझली बहू हैं। इंदु बातूनी और
स्पष्टवादिनी है। मंझली बहू हँसमुख है जो बात-बात पर ठहाके लगाती है और व्यंग्य
करने में आनंद लेती है।
(घ) वक्ता
के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - वक्ता दादा जी अत्यंत समझदार, धैर्यवान, दूरदर्शी और मधुर
स्वभाव के हैं। वे हर समस्या की गंभीरता को समझते हैं तथा परिस्थितियों के अनुकूल
निर्णय लेते हैं।
XV
- "मैं किन लोगों में आ गई हूँ? ये कैसे लोग हैं-- कुछ भी तो समझ नहीं सकी--- आज कुछ हैं कल कुछ पल में तोला
पल में माशा इनका कुछ भी तो पता नहीं चलता। गर्म होते हैं तो आग बन जाते हैं और
नर्म होते हैं तो मोम से भी कोमल दिखाई देते हैं। आज जिस बात को बुरा कहते हैं, कल उसी की प्रशंसा करते हैं।"
(क) वक्ता
और श्रोता कौन-कौन हैं? उनका परिचय दीजिए।
उत्तर - वक्ता और श्रोता दोनों ही बेला है। वह खुद से बातें कर
रही है। बेला दादा मूलराज के पोते परेश की पत्नी है। वह एक प्रतिष्ठित एवं संपन्न
कुल की सुशिक्षित और आधुनिक विचारों वाली महिला है।
(ख) 'पल में तोला पल
में माशा' वाक्यांश
का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - 'पल में तोला पल में माशा' वाक्यांश का आशय
है कि स्वभाव या व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आना। कभी बहुत नाराज़ तो कभी बहुत
नरम होना।
(ग) वक्ता
के अनुसार उसे किस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है और क्यों?
उत्तर - बेला के अनुसार उसे परिवार वालों के अप्रत्याशित
(जिसकी आशा न हो) व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। कल तक जो लोग उसकी आलोचना
करते थे, दादा जी
के आदेश के बाद वे अचानक उससे अत्यंत सम्मान और दूरी से बात करने लगे हैं।
(घ) वक्ता
के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर - वक्ता बेला है वह आधुनिक विचारों वाली, सुशिक्षित, स्वाभिमानी, परंतु भीतर से
कोमल और संवेदनशील स्त्री है जो अंततः परिवार के आत्मीय सम्मान की भूखी है, कोरे दिखावे की
नहीं।
XVI
- "मैंने एक अनुभवी नौकरानी खोज लाने के लिए कह
दिया है। जो नए फ़ैशन के बड़े घरों में काम कर चुकी हो।"
(क) बेला
ने इंदु को नौकरानी के बारे में क्या कहा था?
उत्तर - बेला ने इंदु को नौकरानी के बारे में कहा था कि उसके
मायके में नौकर बहुत सलीकेदार होते हैं और रजवा जैसी गँवार और फूहड़ नौकरानी वहाँ
दो घड़ी भी नहीं टिक सकती।
(ख)
उपर्युक्त वाक्य किसने, किससे कहा?
उत्तर - उपर्युक्त वाक्य मंझली भाभी ने बेला से कहा है।
(ग) वक्ता
ने नौकरों के संबंध में दादा जी की किस बात का उल्लेख किया?
उत्तर - वक्ता मंझली भाभी ने कहा कि दादा जी पुराने नौकरों के
हक में हैं क्योंकि वे ईमानदार और विश्वसनीय होते हैं तथा पीढ़ियों से काम करते आ
रहे हैं।
(घ) वक्ता
ने रजवा के संबंध में बेला को क्या बताया तथा बेला को क्या सुझाव दिया?
उत्तर - वक्ता ने बताया कि रजवा की सास भी यहीं काम करती थी।
उन्होंने बेला को सुझाव दिया कि वह चाहे तो नई नौकरानी की जगह रजवा की बहू को ही
काम सिखा कर रख ले।
XVII
- "आप मुझे क्यों काँटों में घसीटती हैं? आप मेरे साथ क्यों परायों का-सा व्यवहार करती हैं?"
(क) वक्ता
और श्रोता कौन-कौन हैं? दोनों का परिचय दीजिए।
उत्तर - वक्ता बेला है, घर की छोटी बहू परेश की पत्नी, जो पढ़ी-लिखी ओर
आधुनिक विचारों वाली है। श्रोता बड़ी बहू और मंझली भाभी हैं जो परिवार की बड़ी
महिलाएँ हैं, परिवार
का ख्याल रखती हैं।
(ख) 'काँटों में
घसीटने' का आशय
एवं संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - 'काँटों में घसीटने' का आशय यह है कि जानबूझकर व्यंग्य करना या ऐसा अजनबीपन दिखाना
जिससे सामने वाले को मानसिक कष्ट पहुँचे। यह तब हुआ जब परिवार की स्त्रियाँ दादा
जी के आदेशानुसार बेला से ज़रूरत से ज़्यादा अदब से पेश आने लगीं।
(ग) वक्ता
ने उपर्युक्त कथन किन परिस्थितियों में कहा है और क्यों?
उत्तर - बेला ने यह कथन उस वक्त कहा जब परिवार की स्त्रियाँ
उसे ज़रूरत से ज़्यादा सम्मान देने लगीं और उससे थोड़ी दूरी बना ली, तब इस घुटनभरी
स्थिति से घबराकर बेला ने यह कहा।
(घ)
उपर्युक्त कथन के आधार पर वक्ता की मानसिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर - बेला की मानसिक स्थिति अत्यंत दुखी और घुटन भरी है। वह
इस अति-सम्मान को एक मानसिक प्रताड़ना समझ रही है और परिवार के बीच खुद को बहुत
अकेला और कटा हुआ महसूस कर रही है।
XVIII
- "आप मुझे मेरे मायके भेज दीजिए? मुझे ऐसा लगता है, जैसे मैं अपरिचितों में आ
गई हूँ।"
(क)
उपर्युक्त कथन किसने, किससे किस संदर्भ में कहा है?
उत्तर - यह कथन बेला ने अपने पति परेश से कहा है। जब परिवार के
सभी सदस्यों ने दादा के कहने पर बेला के साथ बनावटी और पराया
व्यवहार दिखाया जो बेला के लिए असहनीय हो गया था।
(ख) वक्ता
को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था?
उत्तर - बेला को ससुराल वालों के अचानक बदले हुए व्यवहार का
सामना करना पड़ रहा था। कोई उससे खुलकर बात नहीं करता था, सब उससे दबते थे
और परायों सा व्यवहार करते थे, जिससे वह अलग-थलग पड़ गई थी।
(ग) उसे
ऐसा क्यों लगने लगा कि वह अपरिचितों में आ गई है?
उत्तर - उसे ऐसा इसलिए लगने लगा क्योंकि अब कोई उससे
लड़ता-झगड़ता नहीं था, न ही कोई
आत्मीयता से पेश आता था। हर व्यक्ति उससे एक दूरी बनाए रखता था और उसकी हर बात में 'हाँ' मिलाता था।
(घ) वक्ता
की बात सुनकर श्रोता ने क्या उत्तर दिया?
उत्तर - बेला की बात सुनकर परेश ने उत्तर दिया कि यह सब दादा
जी के उस आदेश के कारण हो रहा है जिसमें उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को
तुम्हारा सम्मान करने को कहा है।
